ओ.पी.जी. प्रांगण में गणतंत्र दिवस समारोह अत्यंत हर्षोल्लास और गरिमा के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ एंकर्स द्वारा 1930 के लाहौर अधिवेशन और 26 जनवरी के ऐतिहासिक महत्व पर चर्चा से हुआ। इसके पश्चात, 'एक राष्ट्र का उदय' लघु नाटिका में विद्यार्थियों ने अंबेडकर, नेहरू और पटेल के संवादों के माध्यम से संविधान निर्माण की यात्रा को मंच पर जीवंत किया। 'प्रस्तावना: हमारी आत्मा का दर्पण' विषय पर हिंदी भाषण और तत्पश्चात पूरे सदन द्वारा किए गए सामूहिक प्रस्तावना वाचन ने माहौल को राष्ट्रभक्ति से भर दिया। सामाजिक विज्ञान विभाग ने संविधान को 'जीवंत दस्तावेज' बताते हुए प्रमुख संशोधनों पर अंग्रेजी में ज्ञानवर्धक प्रस्तुति दी। जहाँ एक ओर 'मैं भारत का संविधान बोल रहा हूँ' कविता ने कर्तव्यों का बोध कराया, वहीं 'हम कितने लोकतांत्रिक हैं' विषय पर हुए वाद-विवाद ने सभी को सोचने पर विवश किया। अंत में, राष्ट्रगान 'जन-गण-मन' के साथ इस प्रेरणादायक समारोह का समापन हुआ।